अटारी में दादाजी और उनका पोता एक पुरानी पेटी खोलते हुए — सुनहरी रोशनी में प्रेम और संस्कार का दृश्य।

संस्कार: चार अदृश्य चाबियाँ जो दादाजी की पेटी खोलती हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि असली खजाना कहाँ छिपा होता है? आठ साल के जिज्ञासु आरव को लगा कि वह सोना-हीरा होगा। छुट्टियों…

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एक उज्ज्वल दिव्य ग्रंथ जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा और रंग-बिरंगे पक्षी प्रकट हो रहे हैं; सामने ध्यान मुद्रा में बैठा साधक और ग्रंथ से उगता हुआ एक नन्हा हरा अंकुर।
जब शास्त्रों का दिव्य ज्ञान ध्यान और प्रकृति के साथ मिलकर प्रवाहित होता है, तब आत्मा मोक्ष की ओर अग्रसर होती है।

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