मेधा ऋषि के आश्रम में राजा सुरथ और समाधि वैश्य को उपदेश देते हुए, जहाँ पृष्ठभूमि में महामाया का मोह-जाल दिखाई दे रहा है। (Sage Medha in his ashram explaining the cosmic web of Goddess Mahamaya to King Surath and Samadhi Vaishya.)

श्री दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय: राजा सुरथ, समाधि वैश्य और महामाया का प्रभाव

क्या मोह से मुक्ति ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य है? मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिसे वह अपना मानता है,…

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एक उज्ज्वल दिव्य ग्रंथ जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा और रंग-बिरंगे पक्षी प्रकट हो रहे हैं; सामने ध्यान मुद्रा में बैठा साधक और ग्रंथ से उगता हुआ एक नन्हा हरा अंकुर।
जब शास्त्रों का दिव्य ज्ञान ध्यान और प्रकृति के साथ मिलकर प्रवाहित होता है, तब आत्मा मोक्ष की ओर अग्रसर होती है।

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